भारतीय नौसेना में शामिल होगी ऑटोनोमस बोट, रक्षामंत्रालय ने दी मंजूरी, चीन और अमेरिका में ड्रोन बोट की होड़

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AUTONOMOUS SURFACE CRAFT: ऑटोनोमस नेविगेशन तकनीक को पहले बड़े जंगी जहाजों में शामिल करने में दुनिया की बड़ी नौसेना हिचकिचा रही थी, लेकिन छोटी बोट जिन्हें नौसेना में कटर के नाम से जाना जाता है, उन पर ये तकनीक इस्तेमाल की गई. आज अमेरिका, चीन, रूस भारत के अलावा जर्मनी, इज़राइल, सिंगापुर, यूके और फ्रांस इस तरह के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं.

AUTONOMOUS SURFACE CRAFT: आज की जंग आमने-सामने की लड़ाई के बजाय ड्रोन और लॉन्ग रेंज हथियारों से लड़ी जा रही है. भारत फिलहाल टू फ्रंट वॉर की संभावनाओं के तहत अपनी ताकत में इजाफा कर रहा है, वो भी स्वदेशी तरीके से. नीले समंदर में दुश्मन के खतरों को अब स्वदेशी तकनीक से जवाब देने की तैयारी पूरी है. इसमें सबसे नया है ऑटोनोमस बोट, यानी बिना किसी क्रू के ऑपरेट होने वाली बोट. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में कॉम्पेक्ट ऑटोनोमस सर्फेस क्राफ्ट की खरीद को मंजूरी दे दी गई. इसके नेवी में शामिल होने के बाद दुश्मन के एंटी सबमरीन वॉरफेयर के खतरे को डिटेक्ट करना और उसे नष्ट करना आसान होगा.

ऑटोनोमस सर्फेस क्राफ्ट की खासियत
ड्रोन बोट के जरिए हूती लगातार रेड सी में अमेरिकी वॉरशिप और मर्चेंट वेसल को निशाना बनाते हैं. अब इसी तरह की बोट भारतीय नौसेना में भी शामिल हो रही है, जो भारतीय नौसेना की निगरानी को और बढ़ा देगी. आत्मनिर्भर भारत के तहत इस तरह की बोट को स्वदेशी तौर पर भी बनाया जा रहा है. इस तरह की स्वदेशी बोट या ऑटोनोमस प्लेटफॉर्म को दोनों तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है, यानी मानव रहित भी और क्रू के साथ भी. ऑटोनोमस ड्रोन शिप का पहला काम है निगरानी करना, खास तौर पर भारत के तटीय इलाकों में. अब तक सामान्य बोट के जरिए सर्विलांस किया जाता है, जिसकी एक सीमित दूरी होती है, लेकिन कई सारे सेंसर से लैस ऑटोनोमस बोट सर्विलांस रेंज को भी बढ़ा देगा. इस बोट में एक वेपन भी लगे होंगे, जिससे ऑफेंसिव ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. इसका नजारा भारत मंडपम में आयोजित स्वावलंबन 2024 में भी दिखाई दिया था. इस बोट का नेवी ने भी ट्रायल कर लिया है.

दुनिया में ड्रोन शिप के निर्माण की होड़
चीन ने अपने बड़े मानवरहित जहाजों को ड्रोन शिप नाम दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने अपनी नौसेना में इन्हें शामिल करना भी शुरू कर दिया है. 2023 में ही ड्रोन शिप निर्माण में बड़ा ब्रेकथ्रू हासिल किया था. चीन ड्रोन शिप की खासियत का दावा करता है कि यह 200 टन क्लास का शिप अपनी अधिकतम रफ्तार 20 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार पर समुद्र में मूव कर सकता है. ये ड्रोन शिप सी स्टेट 5 तक आसानी से ऑपरेट कर सकता है, यानी हवा की रफ्तार 17 से 21 नॉट और लहरें तकरीबन 6 से 8 फीट तक उठती हैं और ये सी स्टेट 6 तक अपने ऑपरेशन को भी अंजाम दे सकता है. 2022 में इसका पहला समुद्री ट्रायल किया गया था. चीन ने कई मानव रहित वेसल भी डेवलप किए हैं, जिसमें पेट्रोलिंग बोट भी है, जिसका डिस्प्ले चीन ने 2022 के एयरशो में किया था. पेलोड, रडार और इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सिस्टम से लैस ये बोट 35 नॉट की रफ्तार से 220 नॉटिकल मील तक ऑपरेट कर सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने तकरीबन 56 छोटे साइज़ के मानवरहित बोट का परीक्षण साउथ चाइना सी में साल 2018 में किया था. चीन तो 15 मीटर लंबे JARI मल्टी पर्पज़ अनमैंड कॉम्बेट वेसल को भी डेवलप कर चुका है. बताया जा रहा है कि ये 20 टन वज़नी वेसल एयर डिफेंस, एंटी शिप और एंटी सबमरीन वर्टिकल लॉन्च मिसाइल और टॉरपीडो दागने में सक्षम है. ये कॉम्बेट बोट 42 नॉट की रफ्तार से 500 नॉटिकल मील तक का सफर तय कर सकती है.

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